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##मन का जवाब।

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जब मैं चल रहा था किसी ने खिंचा मुझे कुछ कदम पीछे  मैं अभी संभल ही रहा था कि थोड़ा हिला दिया किसी ने संयम रखा ही था कि क्रोध दिला दिया किसी ने जब जब कुछ करने जाता हूं वक्त ने सता दिया मुझे  बुरा नहीं हूं मैं हालात ने बना दिया मुझे| मैं कर लेता ये भी मैं कर लेता वो भी कोई भरोसा दिला देता मुझे। मन में छिपे इन सवालों के जवाब भी मन को बता देता कोई क्यों!इस अविश्वास को क्यों झेल रहा तू मन; क्यों नहीं बताता खुद को , क्यों नहीं एहसास दिलाता  'तू मेरे वजूद से खेल रहा  मन'   !