#अहंकार
अहंकार! कि मैं हूं तुम से समझदार अहंकार! कि मैं हूं तुम्हारा तारणहार अहंकार! कि मैं हूं तुम्हारे अस्तित्व का हकदार अहंकार! कि करूंगा मैं जो चाहूं, क्या है तुम्हारा अधिकार अहंकार! कि मैं हूं खुद और तुम भी हो मुझसे, कौन सा बड़ा काम करती हो तुम हर बार मेरा कर्जा उतार। अहंकार! कि मैं हर बार नीचा दिखाऊंगा तुमको, ताकि मुझे ऊंचा समझेगा ये संसार अहंकार! कि मैं खत्म करूंगा सब बार बार, कब तक तुम बचाती रहोगी अपने घर की दीवार अहंकार! कि मैं हूं तो मेरा हक है पहले, तुम कौन होती हो उसकी हिस्सेदार अहंकार! कि मैं खत्म कर दूंगा सब, क्या है तुम्हारा जो तुम कर रही हो मुझसे सवाल अहंकार! कि मैं नहीं छोडूंगा कुछ भी तुम्हारे लिए, क्या लेकर आई थी जो चाहिए होता है तुम्हें हर बार अहंकार! कि मेरा ही सब लेकर जी रही हो, फिर भी कहती हो मेहनत तुम्हारी है मेरे फटे हुए को तुम सी रही हो। अहंकार न जाने कब खत्म होगा तुम्हारा न जाने कब ये दौर गुजरेगा जब सब सही होगा ,नाम तुम्हारा साथ जोड़ने में अब शर्म सी आती है मुझे फिर भी है तुमको - अहंकार! है कि तुम हो तो है ये संसार।