शामिल

 

तेरी तरबियत से नवाजू खुद को

तेरा होकर खुद दिखा दूं तुझको

क्या हक दोगी मुझे ?

तेरे सारे आरज़ू खुद से मुकम्मल करुंगा

कहने से पहले मैं तुझमें कुछ इस तरह ढलूंगा


तुम मुझ में ऐसे शामिल थे

मुझे लगा तुम मुझे हासिल थे

मुझे इल्म था हम तेरे काबिल थे

तुझे कहने वाले हम ही ग़ालिब थे

पर कहते हैं !

मन की मर्जियां खुद और खुदा जानता है

देखने वाला तो तुझे और तेरा कहा जानता है

मैं तुझे हकीकत मान तेरे किए हुए वादे जानता था

मुझे क्या पता था तू बस दगा के इरादे जानता था ।


आज भी ख़ुदा के दर पर तेरी सदाएं (आवाज)मांगता हूं

तू नहीं है मेरी तो भी तेरी की हुई वफाएं जानता हूं

मैं नहीं कहता कि मुझे खौफ तेरे जाने का ना हुआ था

देखा तुझे उसका होते, मेरा शरीर पत्थर सा जमा हुआ था

अगर बिछड़ जाए महबूब ,लोग कहते हैं बद्दुआएं देता हूं

जाओ मैं बहते हुए अश्कों के साथ भी तुम्हें दुआएं देता हूं

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