मौजूदगी

 


मैं नहीं कहता कि प्यार में उसके सच्चाई ना थी 

बात बस इतनी सी है मेरे नसीब में बेवफाई थी

वो शायद वक्त के साथ किसी और का होता रहा 

मैं बेफिजूल में उसकी याद में दिन रात रोता रहा 

अब महफ़िल में उसके दिलदार कोई और हो गया 

मैं खड़ा आज भी वहीं जहां मेरा सब कुछ खो गया 


अब उनकी दलीलों पर मैं मन मुताबिक मुस्कुराता हूं 

वो कहते हैं वो खुश हैं मैं अपने क़दम पीछे बढ़ाता हूं

अब

उनकी बातों में किसी और की मौजूदगी नज़र आती है

बीते लम्हों की उनकी जिंदगी से रवानगी समझ आती है

तब

जिनकी नजरें दावे करती थीं  मुझे कभी नहीं भुलाएंगी

आज वो बयां कर रहीं थी मेरी ना मौजूदगी अब उनको और नहीं सताएगी

और 

वो अब मुझे बड़े आसानी से समझाते हैं उन्हें आदत है उनके महबूब की

उनकी निगाहें कहती हैं तुम जाओ अब मुझे जूस्तजू है बस 

अपने सूकून की





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