##लक्ष्य और साथ
एक कहानी जो शायद किसी ने न सुनी हो , कहानी जितनी दिलचस्प है उतनी ही विश्वशनीय । शुरुआत की थी मैंने अपने सपने को पाने की बदल रहा था सब कुछ मेरा अंजाने में , दिन को रात और रात को दिन करके मैं आगे बढ़ रही थी कि तब तक एक नई जिंदगी मुझसे जुड़ रही थी । बात उस दिन की है जब अचानक मां ने कहा कि अब तू बड़ी हो गई है घर की जिम्मेदारियां संभाल ले तो मैं भी निश्चिंत हो जाऊंगी । मां की बात मैं समझ गई थी उनका इशारा किसी दूसरी तरफ था। मैंने मां को समझाया 'मां मैं कोशिश कर रही हूं ' जल्दी ही कुछ न कुछ कर लूंगी। दिन बित रहे थे रातें नज़र नहीं आ रही थी बस बस एक उम्मीद ही थी जो बार बार दरवाजा खटखटा रही थी । मन मायूस हो जाता था ,जी और घबराता था, टूट न जाए ये हौसला निकलता हुआ वक्त बार बार एहसास दिलाता था । आखिरकार मां के सब्र का बांध टूट गया बोल पड़ी वो एक दिन नहीं हो पा रहा तो परेशान न हो मैंने तेरे भविष्य के लिए बहुत कुछ रखा है ताकि तुझे किसी चीज की कमी न हो अपना घर परिवार अच्छे से संभाल लेना बस । मां ने बातों ही बातों में फिर से किसी तरफ इशारा दिया ताकि मैं अब उनको उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर ...