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##लक्ष्य और साथ

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एक कहानी जो शायद किसी ने न सुनी हो , कहानी जितनी दिलचस्प है उतनी ही विश्वशनीय । शुरुआत की थी मैंने अपने सपने को पाने की बदल रहा था सब कुछ मेरा अंजाने में , दिन को रात और रात को दिन करके मैं आगे बढ़ रही थी कि तब तक एक नई जिंदगी मुझसे जुड़ रही थी । बात उस दिन की है जब अचानक मां ने कहा कि अब तू बड़ी हो गई है घर की जिम्मेदारियां संभाल ले तो मैं भी निश्चिंत हो जाऊंगी । मां की बात मैं समझ गई थी उनका इशारा किसी दूसरी तरफ था। मैंने मां को समझाया 'मां मैं कोशिश कर रही हूं ' जल्दी ही कुछ न कुछ कर लूंगी। दिन बित रहे थे रातें नज़र नहीं आ रही थी बस बस एक उम्मीद ही थी जो बार बार दरवाजा खटखटा रही थी ।  मन मायूस हो जाता था ,जी और घबराता था, टूट न जाए ये हौसला निकलता हुआ वक्त बार बार एहसास दिलाता था । आखिरकार मां के सब्र का बांध टूट गया बोल पड़ी वो एक दिन नहीं हो पा रहा तो परेशान न हो मैंने तेरे भविष्य के लिए बहुत कुछ रखा है ताकि तुझे किसी चीज की कमी न हो अपना घर परिवार अच्छे से संभाल लेना बस । मां ने बातों ही बातों में फिर से किसी तरफ इशारा दिया ताकि मैं अब उनको उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर ...

😊😊मां का संघर्ष 😊😊मेरी सफलता😊😊

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बेटी इधर सुनो , मां धीमी सी आवाज में पुकारती है । बेटी मां के पास जाकर पुछती है ,हां मां बोलो , मां कहती दो पल बैठ मेरे पास कुछ अपने काम के बारे में बता मुझे । मां काम बिल्कुल तुम्हारी तरह ही है जैसे तुम दिन रात मेहनत करके मेरे लिए हर चीज की व्यवस्था करती थी उसी तरह हमें भी मेहनत करके समाज के लिए हर चीज की व्यवस्था करनी होती है। मां थोड़ा घबरा गई सोच में पड़ गई क्या बेटी को भी उसी दौर से गुजरना पड़ता है उतनी ही मेहनत करनी पड़ती है ,क्या यही फल था मेरे संघर्ष का ? (मां के मन में उथल-पुथल चल रही थी ) । मां कुछ देर के लिए शांत हो गई ।  आयुषी बता रही थी पर मां के मन में दुखों का भूचाल आ गया था वो परेशान थी तो बस इस बात को लेकर कि क्या फायदा जो मेरी बेटी को भी वह कष्ट झेलने पड़ेंगे जिनसे मैं जुझती आई हूं। मां आयुषी की बातों पर बस सिर को हिला रही थी पर मनउसका  कठिनाइयों से जुझ रहा था । आयुषी मां को समझा कर जाने लगी पर मां ने न तो रोज की तरह उसकी तरफ देखा न ही वह आज कुछ बोली । आयुषी को यह बात कुछ अच्छी नहीं लगी मां कुछ बदली बदली सी थी। देर शाम जब आयुषी घर वापस आई मां अभी भी कुछ खोई ख...

#उम्मीद थी उसकी आंखों में ! # इंतजार था उसके आने का ! ।

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कहानी है एक छोटे-से गांव की उस गांव में सरला देवी अपने बेटे के साथ रहती थी। सरला देवी ने अपने बेटे को बड़  लाड से पाला था मानो तो सरला जी की दुनिया उनके बेटे से शुरू और उस पर ही ख़त्म हो जाती थी। दोनों खुश ‌रहते थे बेटा सरस भी मेहनत करता था घर खर्च भी चलाता  था पर उसकी एक आदत खराब थी वह जो भी कमाता था उसमें से घर का खर्च निकालने के बाद कुछ भी नहीं बचाया करता था। वह सारे पैसे न जाने क्या करता था। सरला देवी सरस की शादी करवाने का सोचने लगी , बात करते करते उन्हें एक अच्छी लड़की भी मिल गई । सरला जी ने सरस की शादी बड़े धूम-धाम से करवाई ।बहू घर आई समय‌‌ बीतने लगा। कुछ महीनों बाद जब बहू सरस की आदतों को जानने लगी तो वो सरला जी से कहने लगी वो सारी बातें जो सरला जी पहले से ही जानती थीं पर उन्होंने ने सरस के खिलाफ बहू से कुछ नहीं कहा। सरस दिन प्रतिदिन और बिगड़ता गया लेकिन सरला जी ने कभी उसे उसकी गलतियों को सुधारने के लिए कभी नहीं कहा और सरस अपनी पत्नी की बातें सुनकर भी अनसुना कर देता था। सरला जी अब सरस की पत्नी से नाराज़ रहने लगी क्योंकि वह सरस को सुधार नहीं पा रही थी। एक दिन सरस काम से घ...

#मुझे खुद के लिए नहीं तेरे लिए जीना था # मां के दिल की बात। । # संघर्ष

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मुझे खुद के लिए नहीं तेरे लिए जीना था , मां अपनी बेटी से आज कहती है जब बिटिया के सारे दोस्त अपने अपने घर को चले जाते हैं जन्मदिन की बधाईयां देकर। आज बिटिया १८ वर्ष की हो गई है।मां अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहती है अब तू बड़ी हो गई है ,तू मुझसे भी अधिक समझदार है। आज तक मेरे पास जो भी था वो सब मैं खुशी खुशी देती रही आगे भी देती रहूंगी । आज का दिन तुम्हारे लिए खास है आज तुमको क्या चाहिए बताओ, बिटिया खुश हो कर बोल पड़ी मां मुझे भी स्कूटी चाहिए दिला दो न । मां अन्दर से टूट गई पर चेहरे पर एक अच्छी सी मुस्कान लाकर बोली हां जल्दी ही दिला दूंगी तू बस अच्छे से मन लगाकर पढ़ना और बड़ अफ़सर बनना। बिटिया ने सर हिलाया और हामी भरते हुए बोली हां मां मैं खुब मन लगा कर पढूंगी। मां जब भी काम करती सोचती रहती इस काम से पैसे कम मिल रहे हैं ऐसा क्या करूं कि स्कूटी के लिए पैसे इकट्ठे हो जाएं ,वह सोचती अगर रखे हुए पैसे से स्कूटी ले लेती हूं तो बीटिया को बाहर पढ़ने कैसे भेजूंगी। मां हर वक्त खोई खोई सी रहने लगी उसे बुलाने पर सुनती भी न थी। एक दिन जब बैठे बैठे  मां को काम करते हुए कुछ न सूझा तो मां ने निर्णय ...