घुटन
उन्हें पता था मैं घुट रहा हूं
पर उन्हें अपने नये रिश्ते संवारने थे
मुझे वो बेइंतहा चाहते थे
पर उन्हें अपने दामन साफ दिखाने थे
मैं बैठा रह जाता था सुबह तक
वो अपने ख्वाबों के सफ़र कर आते थे
मैं हंसता था उनके लिए
वो मुझे देख मेरे खुशी का अंदाजा लगाते थे
कभी पूछ लेते थे याद आ रही है क्या
मैं कैसे बताऊं उसे निहारते हम पूरी रात गुजारते थे

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