#बचपन
कहानी मेरे जीवन के हिस्सों की- बचपन बीत गया ऐसे ,जैसे नादानियां कभी की ही ना हों। फिर आया बड़प्पन , जिम्मेदारियां जैसे पहले से ही जी ली हों। अब आने वाले कल से भी डर लगता है मुझे, कहीं समाज के इन फैसलों से 'खुशियों की चादर' झीनी ना हों । परत दर परत जिंदगी के हिस्से बीत गए, अपनेपन के किस्से बस अतीत जीत गए।