अंदाजा
जाते-जाते वो मुझसे अब बार बार कहती है तुम्हारी आंखें इतना बरसती हैं पता नहीं था तब मैं सोचता हूं क्या सच में मुझे भी पता नहीं था वो इतना जो जताता था "क्या बस दिखाता था?" मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था वो इतने हिम्मतवार होंगे टूटता देखकर भी मुझे ऐसे सवालों के तलबगार होंगे अब अफसोस होता है मुझे उन लम्हों पर जिसमें मैं खुद को कोसता रहता था ना जाने कितने रुमाल आज भिगे होंगे ना जाने कितने अरमान आज टूटे होंगे मेरी वजह से वो आज मुझसे रुठे होंगे!