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#सपने#नज़र
जिंदगी के सफर में तुम अकेले चल रहे थे
हार गए तो क्या हुआ ,तुम फिर से संभल रहे हो।
उम्मीद के डगर पर ख्वाब को संजो रहे थे
बिखर गए तो क्या हुआ ,तुम फिर से उन्हें पिरो रहे हो।
धड़कन तुम्हारी बढ़ रही थी देख रहे थे अरमान नये
आंखें बंद हुई तो क्या हुआ ,तुम फिर से सपनों को जी रहे हो।
उठ रहा था उफ़ान सा तरंग भाव जो मन में
दब गया तो क्या हुआ, तुम समीर बन अभी मचल रहे हो।
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