##ज़हन और तुम
शिकायतें बहुत हैं तुमसे ,
पर मेरी कवायदें भी तुम्हीं हो ।
मैं रूठ जाऊं तुमसे,
पर मेरे दायरे भी तुम्हीं हो ।
रियायतें बख्शीं हैं तुमने ,
पर किसी और के लिए ।
आदतें भी बदल ली हैं तुमने,
पर किसी और के लिए ।
इंतजार में तुम भी ठहरे हुए हो,
पर किसी और के लिए ।
बातें तुम्हारी होती तो हैं,
पर किसी और के लिए।
वक्त रहते थोड़ा संभल जाओ,
कभी मुझे याद करके भी बेवजह मुस्कुराओ ।
मुझे नहीं बनना तुम्हारी जिंदगी को बांधने की पैमाइश ,
पर तुम भी ना बनाओ ,
मेरी जिंदगी' को मेरे लिए ही नुमाइश।

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