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अप्रैल, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

खामोशी

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  खामोशी से गुफ्तगू करते हुए किरदार जिंदगी का निभा रहे हैं, बेख़ौफ़ निकल पड़े हैं उन रास्तों पर जहां सिसकियां बादल बनकर छा रहे हैं। अपने तराजू लिए खड़े हैं,  कसौटी पर खरे उतरे की नहीं गैर माखौल उड़ा रहे हैं , जिम्मेदारियों के बोझ से , 'जीवन' आंखें बंद कर रंजिशो से अब जी चुरा रहा है , पर थककर हार जाना , खुद को खुद से  यूं बेरंग दिखाना इतना आसान कहां? 

#समय

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                       समय  कुछ सुना रहा है अनकही दास्तां चलने के लिए रास्तों को बदलना बता रहा है। खामोशी को आज पंख लगा कर  आसमान में नजरों से उड़ना सीखा रहा है । थके हुए इन सपनों को  दौड़ में जितने का एहसास दिला रहा है।

पल

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               आवाज़ जोर की आई सुनती हो क्या? बड़े तड़के से जवाब आया हां बोलो   ! आज घर के काम जल्दी खत्म करके क्यों न कहीं बाहर चलते हैं काफी दिनों से कहीं गये नहीं है । आराम से पास आकर नीरा पूछती है आज अचानक ये ख्याल कैसे, मुस्कुरा कर रंजीत कहता है जो रोज तुम इतना सब कुछ करती हो हमारे लिए ,सोचा आज आराम दे दूं कुछ कामों से। नीरा जल्दी जल्दी काम खत्म करके तैयार हो ही रही होती है कि एक शोर आता है बाहर  से भागी- भागी जब वो बाहर पहुंचती है जो कुछ भी वो देखती है उस पल में मानों सबकुछ खत्म हो चुका हो उसका, सामने पड़ा एक इंसान जिसकी सांसें तो चल रही थी पर नीरा की धड़कनें रूक सी गई थीं। बेहोशी की हालत में पड़ी हुई नीरा को देख रंजीत दौड़ते हुए पहुंचा उसके पास कुछ पानी के छीटें मारने के बाद जब नीरा होश में आई तो जोर -जोर से रोने लगी, रंजीत के लाख पूछने पर भी उसका कोई जवाब नहीं आया। कहानी अभी बाकी है......