Motivation by ourselves


"कर तू कोशिश की सदियों तक याद रहे ,तू रहे न रहे जग में तेरा नाम रहे। कर तू कुछ ऐसा मंजिल तक पहुंचना तेरा काम रहे, तू रहे न रहे जग में तेरा नाम रहे ।"


सोच कर घबराना क्या है, जब चल दिए हैं तो वापस जाना क्या है।

उम्मीद की है किसी को बताना क्या है, जब करने की ठानी है तो परेशानियों का बहाना क्या है।

मुस्करा कर कुछ जताना क्या है, जब खुशियां खोजने चले हैं तो दुखों को दिखाना क्या है।

ख़ामोश होकर सताना क्या है जब रहना है, साथ तो रूठना मनाना क्या है।

तुम छाया हो मेरी तुमसे छिपाना क्या है, जब शुरू किया है लिखना तो शब्दों का बहाना क्या है।

ख्वाब देख कर नज़रें चुराना क्या है, जब खूल गई हैं आंखें तो उन्हें झपकाना क्या है।

किरणों को देख कर छुप जाना क्या है, जब चलना है रोशनी में तो धूप से जी चुराना क्या है।

चांद की शीतलता से लुभाना क्या है, जब परिश्रम करना है तो आराम फरमाना कया है।


दर्पण में खुद को देख कर इतराना क्या है,जब मंजिल पाना है तो मन को लुभाना क्या है।


सोच बदल कर दिखाना क्या है, जब निर्णय लिया है कुछ बनने का तो दूसरों को समझना क्या है। 


आदर्शों  को बदल कर जताना क्या है, जब करना है कुछ नया तो‌ बंधन में बंध जाना क्या है।



रंगों को बिखेर कर टूट जाना क्या है, जब शुरू किया है सफ़र तो मोड़ों का बदलना क्या है।
 
अब बदल कर खुद को सताना क्या है, जब हम खड़े हैं मंजिल पर तो लौट कर जान क्या है



अपने आप को न समझने का बहाना क्या है, जब खुद से खुद के लिए करना है तो दूसरो का अपनाना क्या है।


साहस को कम कर के पाना क्या है, जब छेड़ दी है जंग तो तलवार को गिराना  क्या है।






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