Self respect



 ख्वाब मेरे इतने ऊंचे हैं मैं पंख लगा के उड़ जाऊंगी
कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी।

आसमान है घर मेरा मैं वहीं घरौंदा बनाऊंगी
कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी।

हवा की तरह रुख़ है मेरा मैं पतंग सी लहराऊंगी
कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी।

नीव हूं मैं अपनी इमारत कि मैं अपना महल खुद बनाऊंगी
कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी।

शख्सियत बन के मैं उभरूंगी अपना वजूद खुद बनाऊंगी
कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी।

फूलों की तरह मैं इस जहां में खुशबू से फैलाऊंगी
कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी।

समुन्दर की लहरें हूं मैं किसी के हाथ न आऊंगी
कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी।

तुम सोच रहे होगे कैसे कर लूंगी मैं बिना किसी साथ के बिना किसी बात के
मैं हूं वो बयार जो अपनी राह अब से खुद बनाऊंगी 
कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी।


तुम हर बात पर सोचते हो तुमसे बिना पूछे सब काम को करने को रोकते हो
मैं अब ना घबराऊंगी आज अपने कदम खुद बढ़ाऊंगी 
कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी।

तुम हालात को मुझसे जोड़ते हो जब हो कुछ ना बस में तो चीजें तोड़ते  हो
मैं वक्त बन कर कयामत तक जाऊंगी अपनी खुशियां खुद ले आऊंगी
कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी।


तुम अपनी पहचान मुझे देकर घर बैठाते हो कह दू तुम्हें कुछ ग़लत तो मेरा वजूद मिटाते हो
मैं अब एक नया फरमान लहराऊंगी अपनी कामयाबी की सीढ़ियां खुद बनाऊंगी
कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी।
  






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