##समय कम है।##कुछ करना है।
जब एक ऐसा समय आता है जब इंसान खुद से कहता है समय अब कम है , कुछ करना है!
गीत की जिंदगी जिम्मेदारियों से भरी थी समय बिताता जा रहा था उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
गीत पढ़ी थी उसे बस कुछ समय चाहिए था अपने पैरों पर खड़े होने के लिए लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था । जब भी गीत कुछ बेहतर करने का सोचती परिस्थितियां ऐसा रूख़ मोड़ लेती थी कि वह हार जाती थी।
गीत ने ठान लिया कि अब चाहे कुछ भी हो वो अपने लिए समय निकाल ही लेगी । उसने निश्चय कर लिया कि घर के काम के साथ वो अपनी पढ़ाई के लिए भी समय निकालेगी , सोचकर वह उठ खड़ी हुई और पढ़ने के लिए अपने कमरे में पहुंचीं ही कि एक आवाज आई 'गीत सुनो तो इधर' ।
गीत भागी भागी पहुंचीं तो देखा कि काम फिर से सामने खड़ा है करने वाला कोई और है नहीं क्योंकि वो आवाज़ गीत की बूढ़ी दादी की थी जो बोलती थी तो पर कल कुछ न पाती थी । गीत काम करना शुरू करती है ,काम करते करते फिर एक बार बिखर जाती है अपने आप में सिमट जाती है ।
उस जगह पर पहुंच जाती है जब न तो समय है साथ उसके ना ही घड़ी उसके लिए कभी ठहरती है। अंदर से मायूस गीत अपने आप से एक बार फिर कहती है तू झुक मत कोशिश कर तू बिल्कुल कर सकती है।
रोज का यही काम था खुद को समझाना और आगे बढ़ते जाना ,बस पता था उसे 'समय अब कम है , कुछ करना है'!
गीत धीरे-धीरे उसी में ढलने लगी अब उसे कुछ समझ नहीं आता काम करती और थोड़ा आराम करती । पढ़ना और आगे बढ़ना जैसे कहीं पीछे छूट गया था ।
एक दिन अचानक उसके सामने एक परीक्षा का फल आया उसमें सैकड़ों लोग पास हुए ,वह फल उस परीक्षा का था जिसे वह पाना चाहती थी । गीत फिर से हताश सी हो गई कुछ समय के लिए वो अपने आप को कह रही थी 'तुम खुद इस दुःख की ज़िम्मेदार हो' वक्त रहते हुए तुमने अच्छे से प्रयास नहीं किया ।
बैठे बैठे वह खुद को कोसती रही अपने आप से घृणा कर रही थी पूरा दिन बीत गया यह सोचते सोचते कि काश उसने कुछ पढ़ा होता थोड़ी मेहनत की होती तो आज इस परीक्षा फल में शायद उसका भी नाम होता ।
उदास मन से बैठी ही थी तब तक 'मां' की आवाज़ आई "उदास न हो तू हताश न हो, मंजिल तेरी होगी ये विश्वास न को"!
गीत की आंखों में उमंग भरी आंखों के मोती छलक उठे फूट फूट कर वो खूब रोई मां के आंचल में सर रख कर सोई ।
गीत की नई सुबह निराली थी वो अब अपने रंग में रंगने वाली थी।
आज से उसे एहसास हुआ जीवन की मुश्किलें खत्म नहीं होने वाली हैं, मुझे इनके साथ मिलकर अपनी नई पहचान बनानी है।
गीत अब जब भी समय पाती पढ़ती और सारे काम भी करती रहती थी । उसके अंदर एक नई ऊर्जा का संचार हुआ जिससे उसका आगे बढ़ने का हौसला बुलंद होता रहा ।
गीत अब भी प्रयासरत है अपने सपनों को साकार करने के लिए।
वक्त था , है और रहेगा, उन्नतिशील पथ पर अग्रसर मनुष्य हर समय यह कहेगा!
साक्षात्कार होगा मुझसे मेरी पहचान का, आत्मविश्वास हर मनुष्य का यह कहेगा !
कठिनाइयों से ऊपर उठेंगे, विश्वास की राह पर चलेंगे मनुष्य हर समय यह कहेगा!
ऊंची उड़ानें भरकर मंजिल तक का सफर तय करेगा , आत्मबल हर मनुष्य का यह कहेगा!
##उम्मीद की डोरी से ऊंची उड़ान भरना , वक्त रहते यह समझ जाना -

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