संदेश

सितंबर, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

#अहंकार

चित्र
अहंकार! कि मैं हूं तुम से समझदार  अहंकार! कि मैं हूं तुम्हारा तारणहार अहंकार! कि मैं हूं तुम्हारे अस्तित्व का हकदार अहंकार! कि करूंगा मैं जो चाहूं, क्या है तुम्हारा अधिकार  अहंकार! कि मैं हूं खुद और तुम भी हो मुझसे, कौन सा बड़ा काम  करती हो तुम हर बार मेरा कर्जा उतार। अहंकार! कि मैं हर बार नीचा दिखाऊंगा तुमको, ताकि मुझे ऊंचा समझेगा ये संसार  अहंकार! कि मैं खत्म करूंगा सब बार बार, कब तक तुम बचाती रहोगी अपने घर की दीवार अहंकार! कि मैं हूं तो मेरा हक है पहले, तुम कौन होती हो उसकी हिस्सेदार  अहंकार! कि मैं खत्म कर दूंगा सब, क्या है तुम्हारा जो तुम कर रही हो मुझसे सवाल  अहंकार! कि मैं नहीं छोडूंगा कुछ भी तुम्हारे लिए, क्या लेकर आई थी जो चाहिए होता है तुम्हें हर बार अहंकार! कि मेरा ही सब लेकर जी रही हो, फिर भी कहती हो मेहनत तुम्हारी है मेरे फटे हुए को तुम सी रही हो। अहंकार न जाने कब खत्म होगा तुम्हारा न जाने कब ये दौर गुजरेगा जब सब सही होगा ,नाम तुम्हारा साथ जोड़ने में अब शर्म सी आती है मुझे फिर भी है तुमको -  अहंकार! है कि तुम हो तो है ये संसार। 

##अस्तित्व

चित्र
 

##एहसास

चित्र
  

##लक्ष्य और साथ

चित्र
एक कहानी जो शायद किसी ने न सुनी हो , कहानी जितनी दिलचस्प है उतनी ही विश्वशनीय । शुरुआत की थी मैंने अपने सपने को पाने की बदल रहा था सब कुछ मेरा अंजाने में , दिन को रात और रात को दिन करके मैं आगे बढ़ रही थी कि तब तक एक नई जिंदगी मुझसे जुड़ रही थी । बात उस दिन की है जब अचानक मां ने कहा कि अब तू बड़ी हो गई है घर की जिम्मेदारियां संभाल ले तो मैं भी निश्चिंत हो जाऊंगी । मां की बात मैं समझ गई थी उनका इशारा किसी दूसरी तरफ था। मैंने मां को समझाया 'मां मैं कोशिश कर रही हूं ' जल्दी ही कुछ न कुछ कर लूंगी। दिन बित रहे थे रातें नज़र नहीं आ रही थी बस बस एक उम्मीद ही थी जो बार बार दरवाजा खटखटा रही थी ।  मन मायूस हो जाता था ,जी और घबराता था, टूट न जाए ये हौसला निकलता हुआ वक्त बार बार एहसास दिलाता था । आखिरकार मां के सब्र का बांध टूट गया बोल पड़ी वो एक दिन नहीं हो पा रहा तो परेशान न हो मैंने तेरे भविष्य के लिए बहुत कुछ रखा है ताकि तुझे किसी चीज की कमी न हो अपना घर परिवार अच्छे से संभाल लेना बस । मां ने बातों ही बातों में फिर से किसी तरफ इशारा दिया ताकि मैं अब उनको उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर ...

##हौसला है जनाब!

चित्र
  कर रहा कुछ खास ये वक्त है जनाब ! बदल रहे हैं हालात लग रहा है समय चल रहा है साथ । ख़ामोश होकर भी कह रहा है बेहिसाब ये शख्शियत है जनाब! बदल रहे हैं नजरिए लगता है मेहनत कर रहा है अपना काम। चलना, उठना, संभलना ये कदमों की चाल है जनाब ! बिना रूके पहुंच रहे हैं मंजिल के पास लगता है हौसला है बेहिसाब। तेज़, उमंग, तरंग, चमक तैर रही हैं ये आंखें हैं जनाब! हर तरफ रोशनी है लगता है क़िस्मत के सितारे भी हैं आस पास।  छोटा, बड़ा दिन रात के हिसाब से ये अपनी ही परछाई है जनाब! कोई उन रास्तों पर चलने जा रहा है कल आज में बदलने जा रहा है। चारो तरफ अपने हैं अपनो का है साथ ये सफलता है जनाब! वक्त बदल रहा है जिंदगी सही मायनों में चल रही है सब कुछ फिर से संभल रहा है ।  

##मुकाम##

चित्र
    खुद की पहचान हूं, कहो तो बस एक इंसान हूं। आसान है खुल के जीना ,कहो तो बस एक छोटी सी उड़ान हूं। समय के साथ चलना है, कहो तो बस सामंजस्य  का नाम हूं। आंखों में तेज़ है कुछ कर गुजरने का कहो तो बस अरमान हूं। पैर थक रहे हैं दूर चलकर जाना है कहो तो बस मुकाम हूं।

##उम्मीद

चित्र
 

##मंजिल ##सफलता

चित्र
  आंखों में जो मंजर है निखर कर जमीं पर उतरेगा अफसानों जैसा मेरा वजूद एक दिन हकीक़त बन कर संवरेगा । वक्त को जो आसार है परिवर्तन बन कर निखरेगा   फौलाद जैसा मेरा हौसला एक दिन नया इतिहास रचेगा ।

Success

चित्र