##मुकाम##
खुद की पहचान हूं, कहो तो बस एक इंसान हूं।
आसान है खुल के जीना ,कहो तो बस एक छोटी सी उड़ान हूं।
समय के साथ चलना है, कहो तो बस सामंजस्य का नाम हूं।
आंखों में तेज़ है कुछ कर गुजरने का कहो तो बस अरमान हूं।
पैर थक रहे हैं दूर चलकर जाना है कहो तो बस मुकाम हूं।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें