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# नज़र अंदाज़

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 चुभते हैं  ये छोटे छोटे तुम्हारे नज़रंदाज़ किए हुए पल  दिल बिखर जाता है दो टक में  हो जैसे कोई कांच का महल। बुद्धू सा है ये मन‌ आहट सुनते ही तुम्हारी भूल जाता है बीता कैसे वो कल न जाने कैसा होगा आने वाला वो  पल।

#माहिर

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 मुझे किश्तों में नहीं  एक मुश्त में तेरा वक्त चाहिए तू कभी बीते लम्हों को याद कर  अपने ख़ास पल मुझ पर ज़ाया ना करना । मुझे तेरा सुकून बनने की ख्वाहिश है बेगैरत ये जिंदगी न जाने कितनों पर बोझ बनी फ़िर रही । तू बस !  अपने जज्बातों के बदलने का एहसास करा देना   अपनी आदतों को बदलने में हम माहिर बहुत हैं।

#एहसास

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 क्या हकीकत में तुम्हें एहसास नहीं! कल जिस समय को लेकर कश्मकश में थे तुम,  वो पल मेरे सामने आज ले आए हो।      कल जिस बात पर ख़फ़ा थे तुम ! वो रात आज मेरे लिए, 'शायद अंजाने में'  पर यूं ही, बड़ी आसानी से ले आए हो।    अपने ज़हन को थोड़ा टटोल कर तो देखो ! कहते हो मुझे मालूम नहीं था  जज़्बातों के दायरे क्या सिर्फ खुद के लिए बनाए हो ।

#तुम और मैं

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तुम्हें गुरुर है उसके होने का इतना ना तोड़ो की तुम में ही टूट कर बिखर जाए। साथ छोड़ दिया है तुमने, तो वक्त भी दे दो उसे   कुछ खुद में सिमट पाए । तुमको आदत है बस उसे अपना कहने की उसे आदत होती जा रही है तुम्हारी यादों के साथ रहने की। थोड़ा सा संभल जाओ तुम! खुद के लिए ना सही उस पर ही तरस खाओ । क्यों खुद तक समेट रखा है उसे उसे भी खुद के दायरे से आगे बढ़ाओ। जिंदगी में तुम्हारे लोग बहुत हैं अपनी जिंदगी के अहम पहलू उसके सामने भी लाओ। तुम में जो सिमट रहा है उसे उसकी सही पहचान से रुबरु कराओ । वक्त रहते थोड़ा तुम संभल जाओ, खेलों नहीं उसके जज्बातों से उसे भी जीने के नये मौके से मिलने का एहसास दिलाओ।