#एहसास


 क्या हकीकत में तुम्हें एहसास नहीं!

कल जिस समय को लेकर कश्मकश में थे तुम, 

वो पल मेरे सामने आज ले आए हो।

     कल जिस बात पर ख़फ़ा थे तुम !

वो रात आज मेरे लिए, 'शायद अंजाने में' 

पर यूं ही, बड़ी आसानी से ले आए हो।

   अपने ज़हन को थोड़ा टटोल कर तो देखो !

कहते हो मुझे मालूम नहीं था

 जज़्बातों के दायरे क्या सिर्फ खुद के लिए बनाए हो ।

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