# नज़र अंदाज़
चुभते हैं ये छोटे छोटे तुम्हारे नज़रंदाज़ किए हुए पल
दिल बिखर जाता है दो टक में
हो जैसे कोई कांच का महल।
बुद्धू सा है ये मन
आहट सुनते ही तुम्हारी भूल जाता है
बीता कैसे वो कल
न जाने कैसा होगा आने वाला वो पल।
चुभते हैं ये छोटे छोटे तुम्हारे नज़रंदाज़ किए हुए पल
दिल बिखर जाता है दो टक में
हो जैसे कोई कांच का महल।
बुद्धू सा है ये मन
आहट सुनते ही तुम्हारी भूल जाता है
बीता कैसे वो कल
न जाने कैसा होगा आने वाला वो पल।
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