#माहिर



 मुझे किश्तों में नहीं 

एक मुश्त में तेरा वक्त चाहिए

तू कभी बीते लम्हों को याद कर 

अपने ख़ास पल मुझ पर ज़ाया ना करना ।

मुझे तेरा सुकून बनने की ख्वाहिश है

बेगैरत ये जिंदगी न जाने कितनों पर बोझ बनी फ़िर रही ।

तू बस ! 

अपने जज्बातों के बदलने का एहसास करा देना 

 अपनी आदतों को बदलने में हम माहिर बहुत हैं।

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