संदेश

#love

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बिखरे हुए पल

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  मैं खुद में इतना उलझ गयी हूं कि सवाल भी सहम जाते हैं। क्या ! बात अपनों से जुड़ी है, ये हालात भी कुछ भरम खाते हैैं । कुछ कहूं तो माखौल उड़ाते हैं, मुझे मुझ पर ही शर्मिंदा कराते हैं। संघर्ष कर रहे मस्तिष्क को अब दिन के उजालों, रात के अंधेरों में कम फ़र्क नज़र आते हैं। जीवन की डोर जो कमजोर हाथों में हो तो अब अबस भी उंगली उठाते हैं । रहकर भी! गुम हूं ,जैसे धड़कन चल तो रही हैं, पर नब्ज़ थम सी गयी है। टूट गया है हर ज़र्रा ज़र्रा मेरी शख्सियत का, इक्ट्ठा करूं तो क्या! जो अधर में है अब बचा ? ख्वाब मेरे छोटे छोटे से थे , इतनी बार टूटे कि आंखों ने भी बंद होने से इंकार कर दिया। गलत था साथ मेरा या गलत इसे बदलते हालात ने कर दिया। उम्मीद नहीं रही मुझे , फिर से वो मंज़र आयेंगे ,  कोई होगा जो मेरा अपना कहलायेगा। अब बिखर कर ही रहने में ,खुद को समेट लिया है मैंने  औरों पर नहीं,खुद पर आखेट किया है मैंने। Motivation by ourselves

#लम्हें

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बीते लम्हें!  खामोशी तेरी कुछ चूभ सी जाती है, बेवजह तू हर वक़्त सताती है । निकाल दू तुझे ख़ुद के जहान से, मेरी ख़ामोशियां हर वक़्त यही सोरी मचाती हैं । शख्सियत तेरी खूब थी जो ना चाहते हुए भी अपने होने का अहसास दिलाती हैं।  चाहूं मैं रूखसत होना तेरी उन यादों से , फिर भी आईना की तरह तेरी झलक आंखों में उतर आती है ।  खामोशी तेरी कुछ चूभ सी जाती है, बेवजह तू हर वक़्त सताती है ।

##हौसला

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वक्त मेरा मेरे साथ है ! कहता है सहने की  क्षमता तुझमें बेहिसाब है। चलते चलते रुकना नहीं , हिम्मत को अपने आप से बढ़ाना  कुछ कर गुजरने का हर वक्त खुद को एहसास दिलाना। किसी और को नहीं ,अपनी आवाज़ को खुद की पहचान बनाना कदम बढ़ते जाएंगे ,मंजिल तक पहुंचने का एहसास दिलाएंगे । संघर्षों  से क़ायम किए गए मुकाम , अपने आप से तुझको दुनिया से रुबरु कराएंगे , संयम है तो चल उन राहों पर वो खुद ब खुद तुझे खुल कर जीना सिखाएंगे।

##मन का जवाब।

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जब मैं चल रहा था किसी ने खिंचा मुझे कुछ कदम पीछे  मैं अभी संभल ही रहा था कि थोड़ा हिला दिया किसी ने संयम रखा ही था कि क्रोध दिला दिया किसी ने जब जब कुछ करने जाता हूं वक्त ने सता दिया मुझे  बुरा नहीं हूं मैं हालात ने बना दिया मुझे| मैं कर लेता ये भी मैं कर लेता वो भी कोई भरोसा दिला देता मुझे। मन में छिपे इन सवालों के जवाब भी मन को बता देता कोई क्यों!इस अविश्वास को क्यों झेल रहा तू मन; क्यों नहीं बताता खुद को , क्यों नहीं एहसास दिलाता  'तू मेरे वजूद से खेल रहा  मन'   !

#खामोशी#शोर

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#सपने#नज़र

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 जिंदगी के सफर में तुम अकेले चल रहे थे  हार गए तो क्या हुआ ,तुम फिर से संभल रहे हो। उम्मीद के डगर पर ख्वाब को संजो रहे थे बिखर गए तो क्या हुआ ,तुम फिर से उन्हें पिरो रहे हो। धड़कन तुम्हारी बढ़ रही थी देख रहे थे अरमान नये आंखें बंद हुई तो क्या हुआ ,तुम फिर से सपनों को जी रहे हो।  उठ रहा था उफ़ान सा तरंग भाव जो मन में दब गया तो क्या हुआ, तुम समीर बन अभी मचल रहे हो।

#अहंकार

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अहंकार! कि मैं हूं तुम से समझदार  अहंकार! कि मैं हूं तुम्हारा तारणहार अहंकार! कि मैं हूं तुम्हारे अस्तित्व का हकदार अहंकार! कि करूंगा मैं जो चाहूं, क्या है तुम्हारा अधिकार  अहंकार! कि मैं हूं खुद और तुम भी हो मुझसे, कौन सा बड़ा काम  करती हो तुम हर बार मेरा कर्जा उतार। अहंकार! कि मैं हर बार नीचा दिखाऊंगा तुमको, ताकि मुझे ऊंचा समझेगा ये संसार  अहंकार! कि मैं खत्म करूंगा सब बार बार, कब तक तुम बचाती रहोगी अपने घर की दीवार अहंकार! कि मैं हूं तो मेरा हक है पहले, तुम कौन होती हो उसकी हिस्सेदार  अहंकार! कि मैं खत्म कर दूंगा सब, क्या है तुम्हारा जो तुम कर रही हो मुझसे सवाल  अहंकार! कि मैं नहीं छोडूंगा कुछ भी तुम्हारे लिए, क्या लेकर आई थी जो चाहिए होता है तुम्हें हर बार अहंकार! कि मेरा ही सब लेकर जी रही हो, फिर भी कहती हो मेहनत तुम्हारी है मेरे फटे हुए को तुम सी रही हो। अहंकार न जाने कब खत्म होगा तुम्हारा न जाने कब ये दौर गुजरेगा जब सब सही होगा ,नाम तुम्हारा साथ जोड़ने में अब शर्म सी आती है मुझे फिर भी है तुमको -  अहंकार! है कि तुम हो तो है ये संसार। 

##अस्तित्व

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##एहसास

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