संदेश

😊😊मां का संघर्ष 😊😊मेरी सफलता😊😊

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बेटी इधर सुनो , मां धीमी सी आवाज में पुकारती है । बेटी मां के पास जाकर पुछती है ,हां मां बोलो , मां कहती दो पल बैठ मेरे पास कुछ अपने काम के बारे में बता मुझे । मां काम बिल्कुल तुम्हारी तरह ही है जैसे तुम दिन रात मेहनत करके मेरे लिए हर चीज की व्यवस्था करती थी उसी तरह हमें भी मेहनत करके समाज के लिए हर चीज की व्यवस्था करनी होती है। मां थोड़ा घबरा गई सोच में पड़ गई क्या बेटी को भी उसी दौर से गुजरना पड़ता है उतनी ही मेहनत करनी पड़ती है ,क्या यही फल था मेरे संघर्ष का ? (मां के मन में उथल-पुथल चल रही थी ) । मां कुछ देर के लिए शांत हो गई ।  आयुषी बता रही थी पर मां के मन में दुखों का भूचाल आ गया था वो परेशान थी तो बस इस बात को लेकर कि क्या फायदा जो मेरी बेटी को भी वह कष्ट झेलने पड़ेंगे जिनसे मैं जुझती आई हूं। मां आयुषी की बातों पर बस सिर को हिला रही थी पर मनउसका  कठिनाइयों से जुझ रहा था । आयुषी मां को समझा कर जाने लगी पर मां ने न तो रोज की तरह उसकी तरफ देखा न ही वह आज कुछ बोली । आयुषी को यह बात कुछ अच्छी नहीं लगी मां कुछ बदली बदली सी थी। देर शाम जब आयुषी घर वापस आई मां अभी भी कुछ खोई ख...

##सफलता जीवन का मूल उद्देश्य

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  कुछ कर तू, न डर तू, सबेरा होगा वक्त जरूर बदलेगा। समय है चलेगा दिन है तो ढलेगा  पर रूकना है नहीं, एक दिन तू जरूर संभलेगा। शूल हैं रास्तों में पथ रोकेंगे ही कहीं पर थमना  है नहीं, प्रतिदिन फूल की तरह खिलना है सही। अज्ञानता शिश उठा के अधर्म से जोड़ेगा कभी  पर झुकना है नहीं, कर्त्तव्य आप आप से करेंगे सभी। विमुख हुई परिस्थितियां हौसला तोड़ेगी ही कभी न कभी पर टूटना  है नहीं, प्रकाश की तरह खुद को बिखेरना है कहीं न कहीं। मुश्किलों के चक्रव्यूह में उलझना है कभी पर साथ छोड़ना है नहीं, काल चक्र को मोडना है सही। भय है लगेगा, हृदय और तेज़ चलेगा पर सांसों को रोकना है नहीं, पग को पथ पर आगे बढ़ाना है सही ।  अंधकार छाया है, हर पल धुंधला है अभी पर आंखों को बंद करना है नहीं, पलकें झुका कर हमारा आगे चलना है सही।  विफलता का मंच है, परिवर्तन अनंत है  पर धैर्य को खोना है नहीं, विश्व के इस पटल पर अवसर जीवनपर्यंत है। निराशा है टूटने का एहसास है पर अथक प्रयास रोकना है नहीं,  विश्वास कर प्रसंग पर लक्ष्य तक तू स्वयं के संग है । डगमगा रहे कदम, अधर में  है जैसे जीव...

##समय कम है।##कुछ करना है।

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जब एक ऐसा समय आता है जब इंसान खुद से कहता है                          समय अब कम है , कुछ करना है! गीत की जिंदगी जिम्मेदारियों से भरी थी समय बिताता जा रहा था उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। गीत पढ़ी थी उसे बस कुछ समय चाहिए था अपने पैरों पर खड़े होने के लिए लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था । जब भी गीत कुछ बेहतर करने का सोचती परिस्थितियां ऐसा रूख़ मोड़ लेती थी कि वह हार जाती थी। गीत ने ठान लिया कि अब चाहे कुछ भी हो वो अपने लिए समय निकाल ही लेगी । उसने निश्चय कर लिया कि घर के काम के साथ वो अपनी पढ़ाई के लिए भी समय निकालेगी , सोचकर वह उठ खड़ी हुई और पढ़ने के लिए अपने कमरे में पहुंचीं ही कि एक आवाज आई  'गीत सुनो तो इधर' । गीत भागी भागी पहुंचीं तो देखा कि काम फिर से सामने खड़ा है करने वाला कोई और है नहीं क्योंकि वो आवाज़ गीत की बूढ़ी दादी की थी जो बोलती थी तो पर कल कुछ न पाती थी । गीत काम करना शुरू करती है ,काम करते करते फिर एक बार बिखर जाती है अपने आप में सिमट जाती है । उस जगह पर पहुंच जाती है जब न तो समय है साथ उसके ना ही घड़ी...

#उम्मीद थी उसकी आंखों में ! # इंतजार था उसके आने का ! ।

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कहानी है एक छोटे-से गांव की उस गांव में सरला देवी अपने बेटे के साथ रहती थी। सरला देवी ने अपने बेटे को बड़  लाड से पाला था मानो तो सरला जी की दुनिया उनके बेटे से शुरू और उस पर ही ख़त्म हो जाती थी। दोनों खुश ‌रहते थे बेटा सरस भी मेहनत करता था घर खर्च भी चलाता  था पर उसकी एक आदत खराब थी वह जो भी कमाता था उसमें से घर का खर्च निकालने के बाद कुछ भी नहीं बचाया करता था। वह सारे पैसे न जाने क्या करता था। सरला देवी सरस की शादी करवाने का सोचने लगी , बात करते करते उन्हें एक अच्छी लड़की भी मिल गई । सरला जी ने सरस की शादी बड़े धूम-धाम से करवाई ।बहू घर आई समय‌‌ बीतने लगा। कुछ महीनों बाद जब बहू सरस की आदतों को जानने लगी तो वो सरला जी से कहने लगी वो सारी बातें जो सरला जी पहले से ही जानती थीं पर उन्होंने ने सरस के खिलाफ बहू से कुछ नहीं कहा। सरस दिन प्रतिदिन और बिगड़ता गया लेकिन सरला जी ने कभी उसे उसकी गलतियों को सुधारने के लिए कभी नहीं कहा और सरस अपनी पत्नी की बातें सुनकर भी अनसुना कर देता था। सरला जी अब सरस की पत्नी से नाराज़ रहने लगी क्योंकि वह सरस को सुधार नहीं पा रही थी। एक दिन सरस काम से घ...

#मुझे खुद के लिए नहीं तेरे लिए जीना था # मां के दिल की बात। । # संघर्ष

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मुझे खुद के लिए नहीं तेरे लिए जीना था , मां अपनी बेटी से आज कहती है जब बिटिया के सारे दोस्त अपने अपने घर को चले जाते हैं जन्मदिन की बधाईयां देकर। आज बिटिया १८ वर्ष की हो गई है।मां अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहती है अब तू बड़ी हो गई है ,तू मुझसे भी अधिक समझदार है। आज तक मेरे पास जो भी था वो सब मैं खुशी खुशी देती रही आगे भी देती रहूंगी । आज का दिन तुम्हारे लिए खास है आज तुमको क्या चाहिए बताओ, बिटिया खुश हो कर बोल पड़ी मां मुझे भी स्कूटी चाहिए दिला दो न । मां अन्दर से टूट गई पर चेहरे पर एक अच्छी सी मुस्कान लाकर बोली हां जल्दी ही दिला दूंगी तू बस अच्छे से मन लगाकर पढ़ना और बड़ अफ़सर बनना। बिटिया ने सर हिलाया और हामी भरते हुए बोली हां मां मैं खुब मन लगा कर पढूंगी। मां जब भी काम करती सोचती रहती इस काम से पैसे कम मिल रहे हैं ऐसा क्या करूं कि स्कूटी के लिए पैसे इकट्ठे हो जाएं ,वह सोचती अगर रखे हुए पैसे से स्कूटी ले लेती हूं तो बीटिया को बाहर पढ़ने कैसे भेजूंगी। मां हर वक्त खोई खोई सी रहने लगी उसे बुलाने पर सुनती भी न थी। एक दिन जब बैठे बैठे  मां को काम करते हुए कुछ न सूझा तो मां ने निर्णय ...

Self respect

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 ख्वाब मेरे इतने ऊंचे हैं मैं पंख लगा के उड़ जाऊंगी कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी। आसमान है घर मेरा मैं वहीं घरौंदा बनाऊंगी कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी। हवा की तरह रुख़ है मेरा मैं पतंग सी लहराऊंगी कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी। नीव हूं मैं अपनी इमारत कि मैं अपना महल खुद बनाऊंगी कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी। शख्सियत बन के मैं उभरूंगी अपना वजूद खुद बनाऊंगी कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी। फूलों की तरह मैं इस जहां में खुशबू से फैलाऊंगी कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी। समुन्दर की लहरें हूं मैं किसी के हाथ न आऊंगी कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी। तुम सोच रहे होगे कैसे कर लूंगी मैं बिना किसी साथ के बिना किसी बात के मैं हूं वो बयार जो अपनी राह अब से खुद बनाऊंगी  कोशिश करते रहोगे तुम मुझे रोकने की मैं आगे बढ़ते जाऊंगी। तुम हर बात पर सोचते हो तुमसे बिना पूछे सब काम को करने को रोकते हो मैं अब ना घबराऊंगी आज अप...

Today's life

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  जीवन और मशीन    आज की जिंदगी मशीन की तरह है , शुरू में एक्सट्रा वर्क करती है धीरे-धीरे आगे चल कर थोड़ी खराबी आती है तो तेल या ग्रीस की तरह दवाएं लेकर हम फिर चल पड़ते हैं। आखिर में जब मशीन खराब होने लगती है तो जिंदगी का आखिरी पड़ाव आ जाता है। फिर हम दवाओं पर भी नहीं चल पाते हैं। यह किसी एक व्यक्ति की बात नहीं है ,इस मोड़ से सभी गुजरते हैं पर फिर भी सब आखिरी पड़ाव पर साथ नहीं देना चाहते हैं। मशीन से जब तक कुछ लाभ होता है सब उस से काम लेते हैं और अंत समय में उसको बुरा भला भी कहते हैं । इसी प्रकार आज का मनुष्य भी होता चला जा रहा है। अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की जगह खुद के लाभ हानि के विषय  में अधिक सोच रहा है। हम न तो जीवन दे सकते हैं न ही ले सकते हैं पर दूसरों को कुछ गलत करता देख अफसोस करने और उनसे घृणा करने की जगह उस गलत काम को कभी खुद न करने तथा अपने परिवार के सदस्यों को भी न करने देने से बचा सकते हैं। जिस प्रकार मशीनों में भाव नहीं होता वैसे ही मनुष्य जीवन में बिना भाव  के चलता जा रहा है। कार्य क्षेत्र में तरक्की पाना अपनी सुख सुविधा बढ़ाना एक मात्र लक्ष्य ...

Motivation by ourselves

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"कर तू कोशिश की सदियों तक याद रहे ,तू रहे न रहे जग में तेरा नाम रहे। कर तू कुछ ऐसा मंजिल तक पहुंचना तेरा काम रहे, तू रहे न रहे जग में तेरा नाम रहे ।" सोच कर घबराना क्या है, जब चल दिए हैं तो वापस जाना क्या है। उम्मीद की है किसी को बताना क्या है, जब करने की ठानी है तो परेशानियों का बहाना क्या है। मुस्करा कर कुछ जताना क्या है, जब खुशियां खोजने चले हैं तो दुखों को दिखाना क्या है। ख़ामोश होकर सताना क्या है जब रहना है, साथ तो रूठना मनाना क्या है। तुम छाया हो मेरी तुमसे छिपाना क्या है, जब शुरू किया है लिखना तो शब्दों का बहाना क्या है। ख्वाब देख कर नज़रें चुराना क्या है, जब खूल गई हैं आंखें तो उन्हें झपकाना क्या है। किरणों को देख कर छुप जाना क्या है, जब चलना है रोशनी में तो धूप से जी चुराना क्या है। चांद की शीतलता से लुभाना क्या है, जब परिश्रम करना है तो आराम फरमाना कया है। दर्पण में खुद को देख कर इतराना क्या है,जब मंजिल पाना है तो मन को लुभाना क्या है। सोच बदल कर दिखाना क्या है, जब निर्णय लिया है कुछ बनने का तो दूसरों को समझना क्या है।  आदर्शों  को बदल कर जताना क्या है, जब करना है क...

Motivational quotes in hindi

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 थक  गया था मैं चलते चलते, कुछ दूर जाकर खड़ा था अब हिम्मत न थी मुझमें चलने की, जैसे कि मैं बेजान सा पड़ा था। तब तक दिख गई मुझे समुन्दर की वो लहरें ,जो कोशिश करने पर अड़ी थी आकर उन्हें किनारे से मिलना है, जो,सौ मिल दूर खड़ी थीं। ख्वाइशों का मंजर टूट सा गया था, आंखें नम हुई मेरी जैसे इस वक्त में मैं खुद अपने हाथों से छूट सा गया था। उन आंखों के आंसू में मुझे मां की झलक सी मिली  कह रही थी तू गुरूर है मेरा ,इतनी जल्दी खुद से रूठ कैसे गया। रास्तों पर कांटे थे पैरों में मेरे छाले थे ,दिल थम सा गया था हिम्मत मेरी टूट सी गयी थी, मैं खुद से ही कुछ रूठ सा गया था  तब तक आवाज़ आई एक अंदर से, ऐसे कैसे तू रुक गया, नजरें तेरी जिसे ढूंढ रही हैं वो मंजिल तेरी सामने खड़ी है। अब बचा नहीं कुछ मेरे पास उम्मीदें सारी छूट गई, देखें थे जो सपने वो शीशे की तरह टूट गए दिख गई मुझे परछाईं तब तक ,कह रही थी बाकी हैं कुछ करतब अभी तक, जीत तेरी होगी साथ हूं मैं जब तक। काला बादल घेरा था जीवन में मेरे हर जगह अंधेरा था, सांसें रुकने वाली थी नजरें झुकने वालीं थी दिल ने दिया झटका तब तक ,सून मेरी आवाज़ को ,...

ख्वाब

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नज़र और नज़रिया  एक एहसास दिलाता है तो दूसरा विश्वास दिलाता है। अपने ख्वाब का एहसास करके       हमें खुद को आगे बढ़ते रहने का विश्वास    दिलाना है।