संदेश

#बचपन

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 कहानी मेरे जीवन के हिस्सों की- बचपन बीत गया ऐसे ,जैसे नादानियां कभी की ही ना हों। फिर आया बड़प्पन , जिम्मेदारियां जैसे पहले से ही जी ली हों।  अब आने वाले कल से भी डर लगता है मुझे, कहीं समाज के इन फैसलों से 'खुशियों की चादर' झीनी ना हों । परत दर परत जिंदगी के हिस्से बीत गए, अपनेपन के किस्से बस अतीत जीत गए।

#ख़ता

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ख़ता तुम्हारी कहां वक्त तो मेरा बदल रहा है ! कोशिश मैं कर रहा हूं कश्मकश को मिटाने की बीती बातों को शब्दों में जताने की। 'मन 'अंदर से खुद को मना रहा है सही ग़लत के मायने सिखा रहा है तुम्हारी यादें तो ज़हन से ना जा पायेंगी ख्वाहिश है! अब कभी आंखें  ना फिर तुमसे टकराएंगी । क्या पता ये दिल फिर खुद को मना  ना पाए   तू नज़र आए तो नज़र अंदाज़ करने की कीमत चूका ना पाए। सच को परछाईं बनाउंगा तेरे दिए हुए सबक जल्द सीख जाउंगा ख़ता एक छोटी सी मैं भी कर जाउंगा जिंदगी को वक्त बदलने के मोड़ पर ले आऊंगा।

खामोशी

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  खामोशी से गुफ्तगू करते हुए किरदार जिंदगी का निभा रहे हैं, बेख़ौफ़ निकल पड़े हैं उन रास्तों पर जहां सिसकियां बादल बनकर छा रहे हैं। अपने तराजू लिए खड़े हैं,  कसौटी पर खरे उतरे की नहीं गैर माखौल उड़ा रहे हैं , जिम्मेदारियों के बोझ से , 'जीवन' आंखें बंद कर रंजिशो से अब जी चुरा रहा है , पर थककर हार जाना , खुद को खुद से  यूं बेरंग दिखाना इतना आसान कहां? 

#समय

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                       समय  कुछ सुना रहा है अनकही दास्तां चलने के लिए रास्तों को बदलना बता रहा है। खामोशी को आज पंख लगा कर  आसमान में नजरों से उड़ना सीखा रहा है । थके हुए इन सपनों को  दौड़ में जितने का एहसास दिला रहा है।

पल

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               आवाज़ जोर की आई सुनती हो क्या? बड़े तड़के से जवाब आया हां बोलो   ! आज घर के काम जल्दी खत्म करके क्यों न कहीं बाहर चलते हैं काफी दिनों से कहीं गये नहीं है । आराम से पास आकर नीरा पूछती है आज अचानक ये ख्याल कैसे, मुस्कुरा कर रंजीत कहता है जो रोज तुम इतना सब कुछ करती हो हमारे लिए ,सोचा आज आराम दे दूं कुछ कामों से। नीरा जल्दी जल्दी काम खत्म करके तैयार हो ही रही होती है कि एक शोर आता है बाहर  से भागी- भागी जब वो बाहर पहुंचती है जो कुछ भी वो देखती है उस पल में मानों सबकुछ खत्म हो चुका हो उसका, सामने पड़ा एक इंसान जिसकी सांसें तो चल रही थी पर नीरा की धड़कनें रूक सी गई थीं। बेहोशी की हालत में पड़ी हुई नीरा को देख रंजीत दौड़ते हुए पहुंचा उसके पास कुछ पानी के छीटें मारने के बाद जब नीरा होश में आई तो जोर -जोर से रोने लगी, रंजीत के लाख पूछने पर भी उसका कोई जवाब नहीं आया। कहानी अभी बाकी है......

#love

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बिखरे हुए पल

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  मैं खुद में इतना उलझ गयी हूं कि सवाल भी सहम जाते हैं। क्या ! बात अपनों से जुड़ी है, ये हालात भी कुछ भरम खाते हैैं । कुछ कहूं तो माखौल उड़ाते हैं, मुझे मुझ पर ही शर्मिंदा कराते हैं। संघर्ष कर रहे मस्तिष्क को अब दिन के उजालों, रात के अंधेरों में कम फ़र्क नज़र आते हैं। जीवन की डोर जो कमजोर हाथों में हो तो अब अबस भी उंगली उठाते हैं । रहकर भी! गुम हूं ,जैसे धड़कन चल तो रही हैं, पर नब्ज़ थम सी गयी है। टूट गया है हर ज़र्रा ज़र्रा मेरी शख्सियत का, इक्ट्ठा करूं तो क्या! जो अधर में है अब बचा ? ख्वाब मेरे छोटे छोटे से थे , इतनी बार टूटे कि आंखों ने भी बंद होने से इंकार कर दिया। गलत था साथ मेरा या गलत इसे बदलते हालात ने कर दिया। उम्मीद नहीं रही मुझे , फिर से वो मंज़र आयेंगे ,  कोई होगा जो मेरा अपना कहलायेगा। अब बिखर कर ही रहने में ,खुद को समेट लिया है मैंने  औरों पर नहीं,खुद पर आखेट किया है मैंने। Motivation by ourselves

#लम्हें

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बीते लम्हें!  खामोशी तेरी कुछ चूभ सी जाती है, बेवजह तू हर वक़्त सताती है । निकाल दू तुझे ख़ुद के जहान से, मेरी ख़ामोशियां हर वक़्त यही सोरी मचाती हैं । शख्सियत तेरी खूब थी जो ना चाहते हुए भी अपने होने का अहसास दिलाती हैं।  चाहूं मैं रूखसत होना तेरी उन यादों से , फिर भी आईना की तरह तेरी झलक आंखों में उतर आती है ।  खामोशी तेरी कुछ चूभ सी जाती है, बेवजह तू हर वक़्त सताती है ।

##हौसला

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वक्त मेरा मेरे साथ है ! कहता है सहने की  क्षमता तुझमें बेहिसाब है। चलते चलते रुकना नहीं , हिम्मत को अपने आप से बढ़ाना  कुछ कर गुजरने का हर वक्त खुद को एहसास दिलाना। किसी और को नहीं ,अपनी आवाज़ को खुद की पहचान बनाना कदम बढ़ते जाएंगे ,मंजिल तक पहुंचने का एहसास दिलाएंगे । संघर्षों  से क़ायम किए गए मुकाम , अपने आप से तुझको दुनिया से रुबरु कराएंगे , संयम है तो चल उन राहों पर वो खुद ब खुद तुझे खुल कर जीना सिखाएंगे।

##मन का जवाब।

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जब मैं चल रहा था किसी ने खिंचा मुझे कुछ कदम पीछे  मैं अभी संभल ही रहा था कि थोड़ा हिला दिया किसी ने संयम रखा ही था कि क्रोध दिला दिया किसी ने जब जब कुछ करने जाता हूं वक्त ने सता दिया मुझे  बुरा नहीं हूं मैं हालात ने बना दिया मुझे| मैं कर लेता ये भी मैं कर लेता वो भी कोई भरोसा दिला देता मुझे। मन में छिपे इन सवालों के जवाब भी मन को बता देता कोई क्यों!इस अविश्वास को क्यों झेल रहा तू मन; क्यों नहीं बताता खुद को , क्यों नहीं एहसास दिलाता  'तू मेरे वजूद से खेल रहा  मन'   !